हम आज ऐसे दौर में जी रहे हैं , जहां मानवीय रिश्ते एकाकीपन का शिकार हो रहे है। भावनाएं संवेदनाओ से शून्य हो रही है । बडे – बुजुर्ग अपने ही परिवारों में अजनबीपन , बेगानापन अनुभव कर रहे है। उचित आदर -सत्कार के लिए तरस रहे हैं । तकनीकी विकास और वैश्वीकरण के युग में पारीवारिक संबंध अपनेपन का मुहताज बन रहे हैं।

ऐसे में ‘ चरण स्पर्श ‘ जैसा अनोखा , अपूर्व कार्यक्रम प्रासंगिक और सटीक है। इसमें बाडों की तहे-दिल से इज्जत और छोटों से हार्दिक प्यार का सलीका समझने और अपनाने का प्रयास शामिल है। परिवारजनो मे बीच संवाद बढाने और आपसी सम्मान को विकसित करने की कोशिश शामिल है।

राहुल कपूर के बारे में

Rahul-kapor

भारत के शीर्ष प्रेरक वक्ता और एक लेखक

राहुल श्रेष्ठ कार्य -प्रदर्शन , टीम -वर्क और रिश्तों में समन्वय जैसे विषयों पर बोलते है। मनोविज्ञान , विज्ञान और आध्यात्म के बेजोड़ मेल से उनके विचारों की अभिव्यक्ति , जोशीले अंदाज़ में प्रस्तुति उन्हें बेमिसाल वक्ता की पहचान दिलाती है । नामी-गिरामी और फोर्च्युन ५०० कंपनियों से वे बतौर प्रेरक वक्ता जुडे रहें हैं और अपनी उत्साहवर्द्धक वाणी से बहुआयामी व सकारात्मक परिवर्तन दिखा चुके है। इसमें बेहतरीन मुनाफ़ा , आय में बढ़ौतरी , बेहतर ग्राहक सेवा और सुचारू संचालन व्यवस्था जैसे लाभ शामिल है।

3 कदम परिवर्तन के लिए

चरण 1

सत्र में भाग लें

चरण 2

एक प्रतिबद्धता

100 दिन की रणनीति

चरण 3

साप्ताहिक चुनौतियां

चरण स्पर्श से मेरी कहानी

चरण स्पर्श – अब तक का सफर

शहर: नासिक

 

आयोजक – नाशिक जीतो चैप्टर

 

स्थान : अनमोल नयनतारा सीटी वण

 

तारीख : ११ फरवरी २०१७

 

सहभागी– १२००

 

शहर: सूरत

 

आयोजक – नाकोडा सोशल ग्रूप

 

स्थान: पंडित दीनदयाल उपाध्याय इनडोर स्टेडियम

 

तारीख : १२ जून २०१६

 

सहभागी- – ७०००

 

अब तक के कार्यक्रमों की झलक

बेल्लारी

 

स्थान :  बी. डी. ए. ए फुटबॉल स्टेडियम, अनंतपुर सड़क, बेल्लारी

 

तारीख :    १९ मार्च २०१७

 

समय :       शाम ६ बजे से

 

सहभागी:     १२००

चेन्नई

 

स्थान :  द म्यूसिक अकाडमी, १६८, टी. टी. कृष्णामचारी सड़क, रॉयापेट, चेन्नई

 

तारीख :  २० मार्च २०१७

 

समय :  शाम ७ बजे से

 

सहभागी : ४००

मैसूर

 

स्थान : प्लैटिनम जुबली ऑडीटोरियाम, जे. के. ग्राउंड, मैसूर

 

तारीख : २६ मार्च २०१७ (रविवार)

 

समय : ६.३० बजे के बाद

 

सहभागी : ८००

विजयपुरा

 

स्थान : कंडगाल्ला श्री हनुमान्ताराय रंगमन्दिरा,

 

स्टेशन सड़क, विजयपुरा

 

तारीख : ९ अप्रैल २०१७

 

समय : शाम ६.३० बजे से

 

सहभागी : ८००

मुंबई

 

स्थान : डोम, कच्छी ग्राउंड, लिंक रोड के बाहर,

 

बोरिवल्ली पश्चिम, मुंबई

 

तारीख :९ अप्रैल २०१७

 

समय : शाम ६.३० बजे से

 

सहभागी : १२००

जालोर

 

स्थान : श्री नंदेश्वर द्वीप, जालोर

 

तारीख :७ मई २०१७

 

समय : ८ बजे से

 

सहभागी : २०००

भीलवारा

 

स्थान : राजीव गांधी ऑडिटोरियम, विजसिंह पैटीक नगर,

 

भीलवारा

 

तारीख :१२ मई २०१७

 

समय : शाम ७.३० बजे से

 

सहभागी : १०००

हमारे साझेदार

संपर्क

 

चरण स्पर्श

एक पहल


हम आज ऐसे दौर में जी रहे हैं , जहां मानवीय रिश्ते एकाकीपन का शिकार हो रहे है।
भावनाएं संवेदनाओ से शून्य हो रही है ।बडे – बुजुर्ग अपने ही परिवारों में अजनबीपन , बेगानापन अनुभव कर रहे है। उचित आदर -सत्कार के लिए तरस रहे हैं ।
तकनीकी विकास और वैश्वीकरण के युग में पारीवारिक संबंध अपनेपन का मुहताज बन रहे हैं।

ऐसे में ‘ चरण स्पर्श ‘ जैसा अनोखा , अपूर्व कार्यक्रम प्रासंगिक और सटीक है। इसमें बाडों की तहे-दिल से इज्जत और छोटों से हार्दिक प्यार का सलीका समझने और अपनाने का प्रयास शामिल है। परिवारजनो मे बीच संवाद बढाने और आपसी सम्मान को विकसित करने की कोशिश शामिल है।

 

उद्देश्य :

 

यह पहल युवा , जिंदादिल वक्ता और उभरते लेखक राहुल कपूर जैन की गहन सोच का नतीजा है । उनका मानना है कि सामाजिक स्तर पर सौहार्द, सामंजस्य और प्रेम स्थापित करने की शुरुआत पारीवारिक इकाई से होती है। भारतीय आध्यात्म में वर्णित ‘ मातृ देवो भव, पितृ देवो भव ‘ की अभिव्यक्ति माता-पिता के चरण स्पर्श के तहत भी होती है। यह मूल-मंत्र इनके इस भगिरथ प्रयास का प्रेरणा स्त्रोत है।
‘चरण स्पर्श ‘ – एक ऐसा अद्वित्तीय कार्यक्रम है , जिसमें माता-पिता के कदम छूकर , उनसे आशीष लेने की महिमा पर चर्चा की जाती है। करीब ९० -मिनट लंबे सत्र और २१ -दिवस के ‘ फोलो-अप ‘ का यह ऐसा बेमिसाल कार्यक्रम है , जो आपके मन के तार छू लेगा। माता -पिता के चरण -स्पर्श के लिए आपको नत मस्तक कर देगा ।
हम सब जानते है कि माता -पिता का स्थान जीवन में अद्वित्तीय , अलौकिक और अतुल्य है । उनकी जगह दुनिया की अन्य वस्तु नहीं ले सकती । उनका उपकार चुकाया नहीं जा सकता । धरती पर विधाता का प्रत्यक्ष स्वरूप , प्रथम गुरु का प्रतिरूप होते है । इन सब बातों को तहे -दिल से महसूस करवाने ,माता -पिता के प्रति कृतज्ञता को शिद्दत से समझने में ‘ चरण स्पर्श ‘ कार्यक्रम एक हृदय स्पर्शी प्रयास है ।

माता-पिता के चरण स्पर्श की महिमा को वैज्ञानिक , मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाने की कोशिश समाहित है । सिर्फ इतना ही नहीं , माता -पिता होने के नाते बच्चों के प्रति दायित्व और उनकी जीवन-प्रगति में जरूरी भूमिका पर भी रोशनी डाली है । इस कार्यक्रम में जज्बातों और भावनाओ के साथ – साथ चिंतन और मनन का खूबसूरत समन्वय जोडा गया है।


 

अभियान का स्वरूप लेने की क्षमता :

 

इस कार्यक्रम का आगाज भारत के अनेक शहरों में सफलतापूर्वक हो गया है। बडी संख्या में लोगों ने तहे-दिल से इसे पसंद किया है। राहुल कपूर जैन का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में एक वृहद अभियान का स्वरूप ले सकती है। समाज में ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत है जहां परिवार की चारों पीढियों के सदस्य एक साथ बैठ कर मूल्य वर्धक , हृदय -स्पर्शी बातों को सुन सके , उनका अनुभव कर सकें ।

राहुल कपूर जैन द्वारा आगज किए गए इस कार्यक्रम की झलक देखने के लिए यह लिंक क्लिक कीजिए :

 

राहुल कपूर जैन

भारत के लोकप्रिय वक्ता और उभरते लेखक ।


अपनी जिंदादिल और ऊर्जावान शैली में वे विविध विषयों पर बोलते है। इसमें कार्यक्षेत्र में कामयाबी , टीम के साथ मिलकर काम करने और व्यक्तिगत संबंधों में बेहतरी जैसे विषय भी शामिल है। उनकी बातों में मनोविज्ञान , विज्ञान और आध्यात्म का समन्वय शामिल होता है।
अपने वक्तव्य में वे लोगों को अपनी भीतरी क्षमताओ को उभारने ,कार्य कौशल को निखारने और जीवन में गुण वत्ता लाने में प्रेरणाजनक मार्ग दर्शन करते है।

 

देढ लाख से भी ज्यादा लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का श्रेय उनके हाथ है । उल्लेखनीय है कि भारत के अलावा ओस्ट्रेलिया, मलेशिया , दुबई , सिंगापुर आदि देशों में अपनी प्रतिभा का परिचय दे चुके है।

लोकप्रिय अखबार ‘ दि टाइम्स आफ़ इंडिया’ में वे स्तंभ लेखक रह चुके है। बतौर लेखक उनकी दो किताबें प्रकशित हुई है। ‘ दि वर्क वाईज’ में युवाओ के लिए बेहतर जीवन के लिए मार्ग दर्शन उजागर है। ‘ डैड एण्ड आई ‘ किताब में उन्होंने अपने दिवंगत पिताजी से जिन्दगी संबंधित फलसफे को बडी संवेदनाओ के साथ व्यक्त किया है ।

वे जानी मानी संस्थान – इंडियन इंस्टिट्यूट ओफ मेनेजमेंट , बेंगलौर के गेस्ट फेकल्टी है। जूनियर चेम्बर इंटरनेशनल द्वारा ‘ आऊट्स्टेंडिंग यंग पर्सन्स ओफ़ इण्डिया अवार्ड ‘ से सम्मानित किया गया है ।

डी एल एफ़ आई पी एल सीजन – ३, ४ तथा ५ में वे रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर क्रिकेट टीम के ओफ़िशियल होस्ट रह चुके है ।  जैन इंटरनेशनल ट्रेड ओरगेनाइजेशन ( जीतो) द्वारा ‘अवार्ड फ़ोर एक्सलेंस ‘ से नवाजे जा चुके है ।  वर्लड स्पिरिचुअल फ़ोरम ने उन्हें ‘ मेन विद ए विजन ‘ खिताब से सम्मानित किया है ।

 

 

 

चरण स्पर्श

एक पहल


हम आज ऐसे दौर में जी रहे हैं , जहां मानवीय रिश्ते एकाकीपन का शिकार हो रहे है।
भावनाएं संवेदनाओ से शून्य हो रही है ।बडे – बुजुर्ग अपने ही परिवारों में अजनबीपन , बेगानापन अनुभव कर रहे है। उचित आदर -सत्कार के लिए तरस रहे हैं ।
तकनीकी विकास और वैश्वीकरण के युग में पारीवारिक संबंध अपनेपन का मुहताज बन रहे हैं।

ऐसे में ‘ चरण स्पर्श ‘ जैसा अनोखा , अपूर्व कार्यक्रम प्रासंगिक और सटीक है। इसमें बाडों की तहे-दिल से इज्जत और छोटों से हार्दिक प्यार का सलीका समझने और अपनाने का प्रयास शामिल है। परिवारजनो मे बीच संवाद बढाने और आपसी सम्मान को विकसित करने की कोशिश शामिल है।

 

उद्देश्य :

 

यह पहल युवा , जिंदादिल वक्ता और उभरते लेखक राहुल कपूर जैन की गहन सोच का नतीजा है । उनका मानना है कि सामाजिक स्तर पर सौहार्द, सामंजस्य और प्रेम स्थापित करने की शुरुआत पारीवारिक इकाई से होती है। भारतीय आध्यात्म में वर्णित ‘ मातृ देवो भव, पितृ देवो भव ‘ की अभिव्यक्ति माता-पिता के चरण स्पर्श के तहत भी होती है। यह मूल-मंत्र इनके इस भगिरथ प्रयास का प्रेरणा स्त्रोत है।
‘चरण स्पर्श ‘ – एक ऐसा अद्वित्तीय कार्यक्रम है , जिसमें माता-पिता के कदम छूकर , उनसे आशीष लेने की महिमा पर चर्चा की जाती है। करीब ९० -मिनट लंबे सत्र और २१ -दिवस के ‘ फोलो-अप ‘ का यह ऐसा बेमिसाल कार्यक्रम है , जो आपके मन के तार छू लेगा। माता -पिता के चरण -स्पर्श के लिए आपको नत मस्तक कर देगा ।
हम सब जानते है कि माता -पिता का स्थान जीवन में अद्वित्तीय , अलौकिक और अतुल्य है । उनकी जगह दुनिया की अन्य वस्तु नहीं ले सकती । उनका उपकार चुकाया नहीं जा सकता । धरती पर विधाता का प्रत्यक्ष स्वरूप , प्रथम गुरु का प्रतिरूप होते है । इन सब बातों को तहे -दिल से महसूस करवाने ,माता -पिता के प्रति कृतज्ञता को शिद्दत से समझने में ‘ चरण स्पर्श ‘ कार्यक्रम एक हृदय स्पर्शी प्रयास है ।

माता-पिता के चरण स्पर्श की महिमा को वैज्ञानिक , मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझाने की कोशिश समाहित है । सिर्फ इतना ही नहीं , माता -पिता होने के नाते बच्चों के प्रति दायित्व और उनकी जीवन-प्रगति में जरूरी भूमिका पर भी रोशनी डाली है । इस कार्यक्रम में जज्बातों और भावनाओ के साथ – साथ चिंतन और मनन का खूबसूरत समन्वय जोडा गया है।


 

अभियान का स्वरूप लेने की क्षमता :

 

इस कार्यक्रम का आगाज भारत के अनेक शहरों में सफलतापूर्वक हो गया है। बडी संख्या में लोगों ने तहे-दिल से इसे पसंद किया है। राहुल कपूर जैन का मानना है कि यह पहल आने वाले समय में एक वृहद अभियान का स्वरूप ले सकती है। समाज में ऐसे कार्यक्रमों की जरूरत है जहां परिवार की चारों पीढियों के सदस्य एक साथ बैठ कर मूल्य वर्धक , हृदय -स्पर्शी बातों को सुन सके , उनका अनुभव कर सकें ।

राहुल कपूर जैन द्वारा आगज किए गए इस कार्यक्रम की झलक देखने के लिए यह लिंक क्लिक कीजिए :

 

“I went to attend Charan Sparsh with no clue of what it was and belonging to this generation, had a back thought that it ought to be not my type- But Charan Sparsh was something that bowled me over!”
“A topic so close to heart-our parents- and still realising so many mind igniting things during that session! It left me with tears in eyes, a lifetime learning for brain, an experience to remember for heart and a wide broad smile of satisfaction! Charan sparsh is an experience which every- every child of this generation should definitely attend and live through it! You are definitely going to go back with a sack full of learnings and actions to implement upon.”

   Palak Singhi
CA, Leadership Trainer

“This program was very inspirational. Charan Sparsh program even inspired my children and they started touching our feets which is still going on. It really left a very long lasting impact/effect on everyone. People here are still remembering Rahul’s lessons taught about Charan Sparsh & it’s only because of Rahul that everyone of us came to know the real meaning of Charan Sparsh . Be it touching the right feet & giving blessings from right hand or any other thing you said. It was a program like never before.”

Yogesh Jain
Director – JITO Apex

 

चरण  स्पर्श – इस शब्द का मतलब यूं तो  सबको  पता था पर राहुलजी , आपने इस शब्द को भावों से जोडा , आपकी हर बात सीधे दिल पर इम्पेक्ट कर रही थी। जब हम कार्यक्रम से बाहर निकले तब २ घंटे पहले आए इंसान से अलग बन गए थे। अब 'रिस्पेक्ट ' बातों में नहीं ' फीलिंग्स' में बदल गया है , जीवन थोडा सरल हो गया है , बहुत से मायनों में सफल हो गया है।

गौरव धारिवाल

व्यावसायिक

श्री नाकोड़ा सोश्यल ग्रुप सूरत द्वारा आयोजितचरण स्पर्शमाता पिता के संस्कारो को आओ करे वंदन का भव्य कार्यक्रम सूरत के प्रसिद्ध पंडित दिन्दयाल उपाध्याय इंडोर स्टेडीयम में दिनांक 12.06.16 को आयोजित हुआ। क़रीब 8000 श्रोताओ की मोजूदगी में मुख्य वक़्ता श्री राहुल कपूर जैन ने प्रेरणादायक स्पीच द्वारा सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया ।राहुलजी आपके माध्यम से चरण स्पर्श के उद्देश्य को हम सभी के ह्रदय तक पहुँचा पाए। संस्था द्वारा आपका ख़ूब ख़ूब धन्यवाद एवं आभार।


– गौतम गुलेच्छाअध्यक्षश्री नाकोड़ा सोशयल ग्रूप सूरत